जहाँ माँ के सिर की पूजा की जाती है , सुरकूट पर्वत पर स्थित है माँ सुरकंडा का मंदिर

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सुरकण्डा माता देवी का मंदिर हिन्दूओं का प्राचीन मंदिर है। सुरकंडा देवी मंदिर 51 शक्ति पीठ में से एक है। सुदकंडा देवी मंदिर धनौल्टी से 6.7 किलोमीटर और चम्बा से 22 किलोमीटर दूरी पर स्थित है। इस मंदिर तक पहुंचाने के लिए लोगों को कद्दूखाल से 1.5 किलोमीटर के पैदल यात्रा करनी पडती है।

समुद्र तल से 9995 फुट की ऊंची पर्वत श्रृंखला पर स्थित है मां सुरकंडा का सिद्ध पीठ| यह मंदिर विश्वेश्वरी दुर्गा सुरकंडा देवी के नाम से प्रसिद्ध है कहा जाता है कि हरिद्वार के पास कनखल में माता सती जी ने अपने पिता दक्ष प्रजापति महाराज द्वारा अपने पति शंकर जी का अनादर करते देखकर क्रोधित होकर यज्ञ कुंड में अपने प्राण उत्सर्ग कर यज्ञ भंग दिया था| तत्पश्चात् भगवान शंकर जी प्रेम विह्वल होकर माता सती के शव को त्रिशूल पर लटका कर अनेक स्थानों का भ्रमण किया इसी क्रम में यहां भी आए| इस स्थान पर माता सती का सिर गिरा था तब से यह स्थान सिद्ध पीठ हो गया|

कहा जाता है कि स्वर्ग के राजा इंद्रदेव जी ने इसी स्थान पर तपस्या की थी. जिससे इसे सुरकुट भी कहा जाता है| मां दुर्गा मां सुरकंडा इस क्षेत्र की चार पट्टियों बमुन्द , सकलाना, गुसाईं पट्टी जौनपुर दशजुला पट्टी की कुलदेवी है आराध्या देवी हैं मंदिर के प्रबंधन हेतु इन्हीं पट्टियों के ग्रामीणों द्वारा सुरकंडा मंदिर प्रबंधक समिति का गठन किया गया |

इस स्थान पर विशेष मेले गंगा दशहरा चैत्र व असुज के नवरात्रि, पंचमी, अष्टमी, नवमी, पूर्णिमा, अमावस्या तथा लगभग प्रतिदिन दर्शनार्थि माता जी के दर्शनों हेतु आते रहते हैं|वर्तमान में मंदिर के मुख्य पुजारी श्री सोहन लाल लेखवार व श्री जगदीश प्रसाद लेखवार हैं |

मुख्या पुजारी सुरकंडा – पंडित जगदीश लेखवार
मो – 9719142937
पंडित जय कृष्ण लेखवार
मो – 8279728353

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